Majhi Ladki Bahin Yojana e-KYC Errors
Majhi Ladki Bahin Yojana e-KYC Errors जो महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र की प्रमुख कल्याणकारी पहलों में से एक है, को हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है। रिपोर्टों से पता चला है कि अनिवार्य e-KYC (electronic Know Your Customer) सत्यापन प्रक्रिया में त्रुटियों के कारण लगभग 45 लाख महिलाएं वित्तीय सहायता पाने से चूक गई हैं।
इस मुद्दे ने सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों की पहुंच और निष्पक्षता पर चिंता जताई है, जो डिजिटल सिस्टम को नेविगेट करने में लाभार्थियों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को उजागर करती है।

Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana को समझना
Mukhyamantri Majhi Ladki Bahin Yojana को 21 से 65 वर्ष की आयु के बीच की विवाहित, तलाकशुदा और निराश्रित महिलाओं को ₹1,500 की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इस योजना का उद्देश्य कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को सहायता प्रदान करना था, जिससे वित्तीय स्थिरता और सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके। लाभार्थी इन निधियों का उपयोग घरेलू जरूरतों, शिक्षा या स्वास्थ्य देखभाल के लिए कर सकते थे।
योजना की कुछ प्रमुख विशेषताएं (Key features):
- Eligibility (पात्रता) 21-65 वर्ष की आयु की महिलाएं, जो विवाहित, तलाकशुदा या विधवा हों।
- Monthly Assistance (मासिक सहायता) ₹1,500 सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर।
- Purpose (उद्देश्य) व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए वित्तीय सहायता।
- Implementation (कार्यान्वयन) अन्य राज्य विभागों के समन्वय में महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग द्वारा निगरानी।
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e-KYC Requirement और इसका प्रभाव
सितंबर 2025 में, महाराष्ट्र सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और धोखाधड़ी के दावों को रोकने के लिए e-KYC verification अनिवार्य कर दिया। लाभार्थियों को सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के लिए शुरू में दो महीने का समय दिया गया था, जिसे बाद में 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ा दिया गया। e-KYC प्रक्रिया में घरेलू पात्रता के बारे में सवालों के जवाब देना और व्यक्तिगत जानकारी की पुष्टि करना शामिल था।
हालांकि, डिजिटल सत्यापन में इस बदलाव के कारण अनपेक्षित कठिनाइयां पैदा हुईं:
- Confusing questions (भ्रमित करने वाले प्रश्न): कुछ लाभार्थियों ने खराब शब्दावली के कारण प्रश्नों का गलत अर्थ निकाला। उदाहरण के लिए, मराठी में एक प्रश्न, “तुमच्या घरातले कोणी सरकारी नोकरीत नाही ना?” (आपके परिवार में कोई सरकारी नौकरी में नहीं है, है ना?), के कारण कुछ महिलाओं ने गलत उत्तर चुन लिया, जिससे वे अपात्र हो गईं।
- Incorrect responses (गलत उत्तर): गलत उत्तर देने के कारण लगभग 24 लाख महिलाओं को लाभ मिलने से अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
- Automatic removals (स्वचालित निष्कासन): e-KYC पूरा न करने या असंगत जानकारी देने के कारण लगभग 55 लाख महिलाओं को योजना से हटा दिया गया।
ये मुद्दे नीतिगत इरादों और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर को उजागर करते हैं, जो कल्याणकारी कार्यक्रमों में उपयोगकर्ता के अनुकूल डिजिटल प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और Verification Drive
इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कई सुधारात्मक उपाय शुरू किए हैं:
- Door-to-door verification प्रभावित लाभार्थियों की पात्रता सत्यापित करने के लिए पूरे महाराष्ट्र में लगभग एक लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तैनात किया जा रहा है।
- Helpline support लाभार्थी अपनी समस्याओं की रिपोर्ट करने या अपने e-KYC प्रतिक्रियाओं के बारे में स्पष्टीकरण मांगने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल कर सकते हैं।
- Cross-department scrutiny WCD विभाग, परिवहन, आईटी, कृषि और सामाजिक न्याय विभागों के साथ मिलकर डेटा का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पात्र महिलाओं को लाभ मिले।
यह सक्रिय दृष्टिकोण उन लोगों के लाभों को बहाल करने के लिए है जिन्हें गलत तरीके से बाहर कर दिया गया था।
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Beneficiaries द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियाँ
e-KYC मुद्दों से प्रभावित कई महिलाओं ने वित्तीय सहायता के एक महत्वपूर्ण स्रोत से कट जाने पर निराशा व्यक्त की है। सामान्य चुनौतियों में शामिल हैं:
- Digital literacy gaps: कुछ लाभार्थी ऑनलाइन फॉर्म या e-KYC की अवधारणा से अपरिचित हैं।
- Language barriers: खराब तरीके से तैयार किए गए प्रश्नों या दोहरे नकारात्मक शब्दों के उपयोग से भ्रम पैदा हुआ।
- Bank account issues: बैंक विवरणों में त्रुटियों के कारण कभी-कभी लाभ हस्तांतरण में देरी या अस्वीकृति हुई।
- Family misunderstandings: चार पहिया वाहनों जैसी संपत्तियों के स्वामित्व ने कुछ लाभार्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया, भले ही वे अन्य मानदंडों को पूरा करती हों।
e-KYC मुद्दे का सांख्यिकीय अवलोकन (Statistical Overview)
| Metric | Number of Beneficiaries |
| कुल शुरूआती पात्र महिलाएं | 2.43 करोड़ |
| जिन महिलाओं ने e-KYC पूरा किया | 1.88 करोड़ |
| वर्तमान में लाभ प्राप्त करने वाली महिलाएं | 1.57 करोड़ |
| e-KYC या संपत्ति संबंधी मुद्दों के कारण हटाई गई महिलाएं | 31 लाख |
| गलत e-KYC प्रतिक्रियाओं के कारण अस्थायी रूप से भुगतान रुका | 24 लाख |
| e-KYC में विफलता के कारण स्थायी रूप से हटाई गई महिलाएं | 55 लाख |
राज्य के लिए वित्तीय प्रभाव (Financial Implications)
अपात्र लाभार्थियों को हटाने से राज्य का वित्तीय बोझ भी कम हुआ है, जिससे प्रति माह अनुमानित ₹825 करोड़ की बचत हुई है। हालांकि, ध्यान यह सुनिश्चित करने पर बना हुआ है कि पात्र महिलाओं को समय पर सहायता मिलती रहे।
कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए व्यापक सबक
MMLBY e-KYC मुद्दा कई व्यापक सबक सिखाता है:
- Simplify digital procedures: कल्याणकारी योजनाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल सत्यापन प्रक्रियाएं स्पष्ट, संक्षिप्त और उपयोगकर्ता के अनुकूल हों।
- Language sensitivity: प्रश्नों में भ्रमित करने वाली शब्दावली या तकनीकी शब्दजाल से बचना चाहिए।
- Field support matters: घर-घर सत्यापन के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं की तैनाती डिजिटल साक्षरता की कमी वाली महिलाओं के लिए समावेशिता सुनिश्चित करती है।
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conclusion
Majhi Ladki Bahin Yojana महाराष्ट्र की लाखों महिलाओं के लिए एक जीवन रेखा रही है। हालांकि, हाल ही में 45 लाख महिलाओं को प्रभावित करने वाली e-KYC errors डिजिटल कल्याण प्रक्रियाओं को लागू करने में बड़ी चुनौतियों को प्रकट करती हैं।
सरकार ने घर-घर सत्यापन और हेल्पलाइन सहायता जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन स्पष्टता, पहुंच और निष्पक्षता पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। MMLBY की सफलता अंततः यह सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है कि प्रत्येक पात्र महिला को वह सहायता मिले जिसकी वह हकदार है।

